अब आप की मर्ज़ी है कि मिलें या न मिलें
हम थक चुके हैं शायद न मिलेंगे इसके बाद
कहिए कि न कहिए, सुनिए कि न सुनिए,
लिखा है हमने नाम तेरी रहगुज़र पे आज
बेचैन हवाओं ने ये मुझे आ के कहा है
वो हमसे मिलेंगे मगर ज़िंदगी के बाद।
अब आप की मर्ज़ी है कि मिलें या न मिलें
हम थक चुके हैं शायद न मिलेंगे इसके बाद
कहिए कि न कहिए, सुनिए कि न सुनिए,
लिखा है हमने नाम तेरी रहगुज़र पे आज
बेचैन हवाओं ने ये मुझे आ के कहा है
वो हमसे मिलेंगे मगर ज़िंदगी के बाद।