Last modified on 28 फ़रवरी 2019, at 12:52

घिरा हुआ योद्धा / कुमार मुकुल

Kumar mukul (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 12:52, 28 फ़रवरी 2019 का अवतरण (' {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार= ​कुमार मुकुल​ |संग्रह= }} {{KKCatKavita}}​​ <...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

​​

मैं एक लाचार मनुष्य
मेरा साहस और जीवट नहीं
बल्कि एक सीमारेखा
परिभाषित करती है मुझे
कि मैं देशभक्त हूँ या घुसपैठिया
गद्दार हूँ या शहीद।
एक सीमारेखा
जिसके दोनों ओर
हथियारों की दलाली के नगमे
बजते रहते हैं अविराम
और इन नगमाकारों को
सलामी बजाते रहने से
सुनते हैं के एक राष्ट्र
सुरक्षित रहता है
अनंतकाल तक।