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हे! भारत विश्वास न तजना / आनन्द बल्लभ 'अमिय'

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हम दीपों का ध्येय यही है घोर अमावस से लड़कर ही
विजयश्री हम प्राप्त करेंगे, हे! भारत विश्वास ना तजना।

चाहे अंधड़ लाखों आयें,
लेकिन हम जलते जाएँगे।
हर बस्ती, बीहड़, विपदा में,
हम उजास करते जाएँगे।

बस इतनी-सी बात समझकर, संकट है; आवास न तजना।
विजयश्री हम प्राप्त करेंगे, हे! भारत विश्वास ना तजना।

लगे पड़े हैं रात दिवस हम,
खोज रहे कोविड की औषधि।
हमको है विश्वास; एक दिन,
अमिय निकालेगा क्षीरोदधि।

हे! रोगी, हे! स्वस्थ्य मनुज, शुभ जीवन का अनुप्रास न तजना।
विजयश्री हम प्राप्त करेंगे, हे! भारत विश्वास ना तजना।

मतवाले हम; निकल पड़े हैं,
धरती स्वच्छ बनाने खातिर।
मौलिकता उर में रखते हैं,
पुत्र नियति के ही हैं आखिर।

करें कूच अपशिष्ट हराने, आर्य! अभी उल्लास न तजना।
विजयश्री हम प्राप्त करेंगे, हे! भारत विश्वास ना तजना।