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कश्ती में कुप्पी तेल की अन्ना उंडेल डाल / रंगीन
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07:21, 8 मार्च 2014
होगा जो उस का वस्ल तो थल बैठियो रे जी
ये हिज्र के जो दिन हैं तो अब इन को झेल डाल
चढ़-मस्त है ददा कहीं उस की ये चुल बुझे
रंगीं ख़ुदा के वास्ते तू इस को खेल डाल
</poem>
Sharda suman
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