Changes

ले गुलाब-सौरभ आँचल में-
झोली भर-भर लगा लुटाने
सुर नभ से उनरे उतरे गुण गाने,
उधर ऊग आये थे भू पर,
हरे राज-द्रोही दीवाने!
Delete, KKSahayogi, Mover, Protect, Reupload, Uploader
19,333
edits