भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

इंद्रधनुष / श्रीप्रसाद

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 12:50, 20 फ़रवरी 2017 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=श्रीप्रसाद |अनुवादक= |संग्रह=मेरी...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बरस-बरस बादल बिखरा है
आसमान धुलकर निखरा है

किरणें खिल-खिल झाँक रही हैं
अपनी शोभा आँक रही हैं

धरती के छोरों तक मिलता
आसमान के ऊपर खिलता

रंग हरा, नारंगी, पीला
लाल, बैंगनी, नीला-नीला

आसमान का रंग मिला फिर
इंद्रधनुष सतरंग खिला फिर
बूँदें जब झरती हों झर-झर
किरणें उतर रही हों सर-सर

बूँदों से जब किरणें मिलतीं
इंद्रधनुष बन करके खिलतीं।