भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

तीन दिना दोइ रात बरन नोनो मूँदियो / बुन्देली

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 13:02, 11 मार्च 2015 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKLokRachna |भाषा=बुन्देली |रचनाकार=अज्ञात |संग्रह=ब...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तीन दिना दोइ रात बरन नोनो मूँदियो।
मूँदो मूँदो जिठनिया की जीभ बरन ऐसो मूँदियो।
मकरी माछी मूँदियो मूँदों पगरेतन की जीभ।
बिच्छू किच्छू मूँदियो मूँदों जेठे बड़न की जीभ।
आँधी बैहर मूँदियों मूँदों कुटुम भरे की जीभ।
तीन दिना दोई रात असुभ नोनो मूँदियो।