ग़ज़लें
- कब तलक चलना है यूँ ही हम-सफ़र से बात कर / भारतभूषण पंत
- एक नए साँचे में ढल जाता हूँ मैं / भारतभूषण पंत
- इश्क़ का रोग तो विर्से में मिला था मुझको / भारतभूषण पंत
- इक गर्दिश-ए-मुदाम भी तक़दीर में रही / भारतभूषण पंत
- आब की तासीर में हूँ प्यास की शिद्दत में हूँ / भारतभूषण पंत
- अंधेरा मिटता नहीं है मिटाना पड़ता है / भारतभूषण पंत
- आईने से पर्दा कर के देखा जाए / भारतभूषण पंत