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आज मेरा गीत / ऋषभ देव शर्मा

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आज मेरा गीत मेरी वासना हो
आज मेरा गीत तेरी कामना हो
 
एक युग से यह नदी ठ्हरी हुई है
बाँध से बंध झील सी गहरी हुई है
 
आज मेरा गीत मेरी वर्जना हो
 आज मेरा गीत तेरी अर्चना हो
 
भूमि का बचपन अभागा जल रहा है
चाँद पय के घट छिपाकर छल रहा है
आज मेरा गीत मेरी याचना हो
आज मेरा गीत तेरी ज्योत्स्ना हो
 
आज ऋतु का वायदा झूठा हुआ है
इस गली से गुलमुहर रूठा हुआ है
 
आज मेरा गीत मेरी कल्पना हो
आज मेरा गीत तेरी वंदना हो