भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

उतना ही है जीवन / शलभ श्रीराम सिंह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

प्यार के पास अपनी आँख होती है
अपनी भाषा होती है प्यार के पास
होती है अपनी राह
 
देखता, बोलता, चलता हुआ प्यार
जहाँ होता है
ज़िन्दा रहता है ज़िन्दगी का अहसास।

सुन्दर को देखता
बोलता हुआ सत्य को
शिव की ओर ले जाता प्यार
जहाँ, जितना है , उतना ही है जीवन।


रचनाकाल : 1992 मसोढ़ा