भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

कथा मूल / शमशेर बहादुर सिंह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

एक

गाय-सानी।संध्या। मुन्नी-मासी!
दूध!दूध! चूल्हा,आग,भूख।
मा।
प्रेम।
रोटी।
मृत्यु।

दो
औरत। अँधेरा। जोड़ों का दर्द। बच्चे।
पाप। पुनर्जन्म।
आत्मोन्नति। पुलिस। आज़ादी। स्वाहा।

तीन

गुरुजन। हिमशिखर। हँसी।

चार

लिंग; मानस। लिंग: अर्वाचीन।
लिंग; शिव; भविष्य।
योनि मात्र शून्य,सदैव-सदैव।
काल; हम-तुम-सब,शिव।
सदा शिव।
तुम तत-सत।
मैं यह क्षण।