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कोई नहीं है तेरा / मधुरिमा सिंह

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कोई नहीं है तेरा
जोगी,
कोई नहीं है तेरा
क्या लाया जो ले जाएगा, करता मेरा-मेरा
दाना डाल के पाँच सुखों का, तन ने जाल बिखेरा
तन को छूकर तन जागे है, भूखा तप्त अँधेरा
सतरंगी सपनो की माया, रचता भाग्य-चितेरा
रिश्ते-नाते बुझ जाते हैं, तन जब आग ने घेरा
तेरे अन्दर बैठा जोगी, बाहर जिसको हेरा
जोगी ! मधु आए ना आए, जनम-जनम का फेरा