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खुनफड की उड़ान / पूनम सिंह

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बुझ गयी हैं
तमाम बत्तियाँ शहर की
अंधेरे का सैलाब
बहा ले गया है
रंग रोशनी के सारे विन्यास
बिना चेहरे वाली आकृतियाँ
औंधी लटकी हैं पेड़ों से
डूबते सूरज के मस्तूल पर
हौवा बैठा है

इस प्रलयंकारी रात में
भय से काँपती
मेरी छोटी बहन
अपने नवजात शिशु के सिरहाने
कजरौटा ढूँढ़ती
व्याकुल स्वर में कह रही है मुझसे
’दीदी! इच्छाओं की प्रेत आत्माएँ
बेखौफ गलियारों में
घूम रही हैं
तुम वातायन बंद कर दो ना‘

और मैं निर्भय निरातंक
दूर कहीं गरजते
जल प्रपात के ऊपर
खुनफड के पंखों की
उड़ान देख रही हूँ

............
चीन की प्राचीन नीति कथा में - ख़ुन नाम की एक मछली का जिक्र है। उत्तरी सागर में रहने वाली इस मछली की लम्बाई चौड़ाई कई हज़ार मील तक की थी। कालांतर में इस मछली ने पक्षी का रूप धारण कर लिया था जिसके कारण इसका नाम फड पड़ा। इस तरह यह खुनफड हो गई। कहा जाता है एक बार यह गुस्से में भर कर उड़ा- उस समय इसके पंख आकाश में फैले बादलों की तरह दिखाई दे रहे थे। यह अपनी पीठ पर पूरा आसमान उठाये उड़ रहा था। इसके विकराल रूप को देखकर दिगदिगन्त काँप उठा था। इसकी उड़ान से दिशाएँ प्रकंपित हो उठी थीं।