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जब मृत्यु आती है / मेरी ओलिवर / रश्मि भारद्वाज

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जब मृत्यु आए
जैसे कि शरद ऋतु का भूखा भालू

जब मृत्यु आए और मुझे ख़रीदने के लिए
अपने बटुए से सारे चमकीले सिक़्क़े निकाले और झट से बन्द कर दे उसका मुँह

जब मृत्यु आए
जैसे कि खसरा

जब मृत्यु आए
जैसे कि कंधे की हड्डियों के बीच एक हिमखण्ड
 
मैं दरवाज़े के बाहर ढेर सारी उत्सुकता लेकर क़दम रखना चाहती हूँ
यह कल्पना करते हुए कि कैसी होगी, वह अन्धेरे की कुटी
और इसलिए मैं अपने आसपास सब कुछ देखती हूँ
बहनापे और बंधुत्व के भाव से

और पाती हूँ कि समय सिर्फ़ एक विचार है
और अनन्तता एक अन्य सम्भावना हो सकती है

सोचती हूँ कि जीवन एक फूल की तरह है
उतना ही आम जितना कि खेत में खिली एक
कुमुदनी और उतना ही विलक्षण
और हर नाम ज़ुबान पर एक आरामदायक संगीत की तरह है
हर संगीत की तरह ख़ामोशी की ओर बढ़ता हुआ
हर शरीर में शेर का साहस है और कुछ क़ीमती है पृथ्वी के लिए

और जब यह ख़त्म हो जाए तो मैं कहना चाहती हूँ
कि सम्पूर्ण जीवन मैं एक दुल्हन थी, कौतूहल से ब्याही
मैं एक दूल्हा थी जिसके आलिंगन में थी यह सारी दुनिया
जब यह ख़त्म हो, मैं नहीं चाहती सोचना
कि क्या मैंने अपने जीवन को कुछ विशेष और वास्तविक बनाया
मैं नहीं चाहती पाना ख़ुद को दुखी, भयभीत या द्वन्द से भरा हुआ
नहीं चाहती कि अन्त में मुझे यह प्रतीत हो
कि मैं इस दुनिया में सिर्फ़ घूम कर गुज़र गई

मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद : रश्मि भारद्वाज