भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

जा, सपनों से खेलना / शकुंतला सिरोठिया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

निंदिया की गोदी में
सो जा मेरे लालना!
सूरज भी सो गया
पेड़ सभी सो गए,
पत्तों की गोदी में,
फूल सभी सो गए।
तू भी चुप सो जा,
जा, सपनों से खेलना!
चिड़ियां भी सो गईं
चिरौंटे भी सो गए,
गोदी में छिप उनके
चुनमुन भी सो गए।
तू भी चुप सो जा,
झुलाऊं तुझे पालना!