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नारी / मीना अग्रवाल

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नारी नाम है उजाले का
नारी नाम है जीवन का
नारी नाम है प्रेम का !
नारी ऐसी नदी है
जो बहती है निरंतर,
देती है गति मानव को
सींचती है रिश्तों को !
अपने खून-पसीने से
नारी उगाती है
संबंधों की फसल
अपने श्रम से,
वह नहीं माँगती
प्रतिदान,
वह तो चाहती है
बस सम्मान,
जहाँ फैलती है
स्वर्णिम आभा प्रेम की
और जहाँ लहलहाते हैं
पौधे ममता के  !
नारी नाम है उस चरित्र का
जो पहुँचाता है
उच्चता के शिखर पर
नारी नाम है उस दीपक का
जो देता है उजाला जग को
नारी नाम है उस ज्योति का
जो जलता है हर क्षण
देती है रोशनी अंधकार को
और तिल-तिल जलकर
मिटा देती है अपना अस्तित्व,
पर दीपित करती है
मानवीय आत्मा को !
नारी नाम है संगीत का
जो बिखरे स्वरों को सँजोकर देती है
नया मधुरिम आकार
किसी अप्रचलित राग को
जो जोड़ती है
सितार के उन तारों से
जो टूटे हैं अधिक तानने से !
नारी नाम है
उस झंकार का
जो जोड़ती है
उन बिखरे घुँघुरुओं को
जो थक गए हैं
थिरकते-थिरकते उन्हें ममता के
धागे में पिरोकर
देती है नई गति
रूपायित करती है
नई ताल और नई लय
जो देती है नई पहचान
मानवता को,
जिससे प्रकाशित है
धरती का कण-कण !
नारी नाम है
उस पुस्तक का जो जलाती है
ज्योति ज्ञान की
मिटाती है अंधकार
जीवन से, नारी नाम है
उस वात्सल्य का जिसके आँचल तले
पलती है पूरी मानवता,
नारी नाम है
जीवन-संगीत का जो होता है झंकृत पल-पल !
नारी नाम है
उस अस्मिता का जो देती है एक पहचान
समाज को, नारी नाम है
प्रेरणा का जो करती है प्रेरित
जन-जन को,
नारी सागर है प्यार का
जो उमड़ता है पल-पल
और भिगो देता है
सबका तन-मन ! नारी नाम है
वीरता का जो फूँक देती है प्राण
वीरों के सोए भावों में, नारी नाम है
उस विश्वास का जो जगा देती है
शक्ति कर्म की,
नारी नाम है
ऐसे साथी का जो देता है सहारा
लड़खड़ाते पाँवों को,
नारी नाम है
उस प्रकाशस्तंभ का
जो देती है नेत्र-ज्योति
दृष्टिहीनों को, खड़ी रहती है
अडिग और अकेली
संघर्ष के क्षणों में भी !
नारी नाम है
उस जीवनधारा का
जो गतिमान है
सदियों से जो जीवन-प्रदायिनी है
युगों-युगों से
नारी की इस संपूर्णता को शत-शत नमन !