भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

पूँजी / विश्वनाथप्रसाद तिवारी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चुटकी भर मिट्टी
चोंच भर पानी
चिलम भर आग
दम भर हवा

पूँजी है यह
खाने
और लेकर
परदेश जाने के लिए।