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माँ की कुछ छोटी कविताएँ (3) / रचना श्रीवास्तव

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माँ तीज त्यौहार मौसम की
बातें करती है
व्रत उपवास पूर्णिमा कब है
बताती है
पिता बेकार बात करती हो कहते हैं
पर उनको पता नहीं
कि माँ मेरे चारों ओर
संस्कार फैला रही होती है