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रिफ्यूजी / तेनजिन त्सुंदे / अरुण चन्द्र रॉय

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सड़क के किनारे
बर्फ में धँसे टेण्ट में
जब मैं पैदा हुआ था
मेरी माँ ने कहा —
तुम शरणार्थी हो !

तुम्हारे माथे पर
दोनों भौंहों के बीच
लिखा है ’र’ —
कहा था शरणार्थी शिविर में
एक शिक्षक ने !

मैंने कोशिश की
रगड़-रगड़ कर
इस चिन्ह को मिटाने की
मेरा माथा छिल कर लाल हो गया
किन्तु यह दाग मिटा नहीं

मैं शरणार्थी पैदा हुआ हूँ
मेरी तीन जीभें हैं,
उनमे से एक जीभ
अब भी गाती है
अपनी मातृभाषा में ।

मेरे माथे पर लिखे ’र’ को
अँग्रेज़ी और हिन्दी की जीभ के बीच
तिब्बती जीभ पढ़ती है :
"रंगजन"
जिसका अर्थ होता है - स्वतन्त्रता !

अँग्रेज़ी से अनुवाद : अरुण चन्द्र रॉय