भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"उसके पहलू से लग के चलते हैं / जॉन एलिया" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(नया पृष्ठ: उसके पहलू से लग के चलते हैं हम कहीं टालने से टलते हैं मै उसी तरह तो …)
(कोई अंतर नहीं)

23:27, 9 जून 2011 का अवतरण

उसके पहलू से लग के चलते हैं हम कहीं टालने से टलते हैं

मै उसी तरह तो बहलता हूँ और सब जिस तरह बहलतें हैं

वो है जान अब हर एक महफ़िल की हम भी अब घर से कम निअक्लते हैं

क्या तकल्लुफ्फ़ करें ये कहने में जो भी खुश है हम उससे जलते हैं