भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"सूरज चाटी आं धोरां री / सांवर दइया" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
('कविता: सूरज चाटी आं धोरां री/सांवर दइया------ {{KKGlobal}} {{KKRachna |र...' के साथ नया पन्ना बनाया)
(कोई अंतर नहीं)

20:23, 16 अक्टूबर 2011 का अवतरण

कविता: सूरज चाटी आं धोरां री/सांवर दइया------

सूरज-चाटी आं धोरां री।
उकळै माटी आं धोरां री॥

सड़कां माथै चाली छोरी कैवै
दौरी घाटी आं धोरां री।

धोरां बिच्चै घायल जात्री
बांधै पाटी आं धोरां री।

तिरसो एक मिरगलो मरग्यो
आंख्यां फाटी आं धोरां री।

बूंद पड़ै पसवाड़ो फोरै
मुळकै माटी आं धोरां री।