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औद्योगिक बस्ती / अज्ञेय

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{{KKRachna
|रचनाकार=अज्ञेय
|संग्रह=अरी ओ करुणा प्रभामय / अज्ञेय
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<Poem>
: पहाड़ियों पर घिरी हुई इस छोटी-सी घाटी में
मानव की आशाएँ ही पल-पल
::उस को छलती जाती हैं।
 
'''ओसाका-हिरोशिमा (रेल में), 17 दिसम्बर, 1957'''
</poem>
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