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"ये अँधेरे भी रहेंगे / प्रताप नारायण सिंह" के अवतरणों में अंतर

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तप्त मरुथल में क्षुधा के
 
तप्त मरुथल में क्षुधा के
चौंधियाती धूप होगी
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चिलचिलाती धूप होगी
 
तौलती पौरुष मनुज का  
 
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मृगतृषा बहु-रूप होगी
 
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घोष "सच हरिनाम" के संग
 
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कारवाँ बढ़ता रहेगा
 
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इन मसानों का धुआँ  
 
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यूँ ही सतत चढ़ता रहेगा
 
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पालने नित सोहरों के
 
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साथ डाले भी रहेंगे
 
साथ डाले भी रहेंगे
 
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15:57, 7 नवम्बर 2019 के समय का अवतरण

ये अँधेरे भी रहेंगे
और उजाले भी रहेंगे

तप्त मरुथल में क्षुधा के
चिलचिलाती धूप होगी
तौलती पौरुष मनुज का
मृगतृषा बहु-रूप होगी

और कुछ लटके हुए
ऊपर निवाले भी रहेंगे

कुछ कहेंगे नित्य ही
बेरंग मौसम की कथाएँ
कुछ उकेरेंगे सदा ही
पतझड़ों की चिर व्यथाएँ

ताप पीकर, कुछ बसंती
गीत वाले भी रहेंगे

कुछ पहनकर नाचते
नरमुंड के गलहार होंगे
क्रन्दनों के शोर में
मदमत्त से हुंकार होंगे

बीच उनके लोग
पक्षी-श्वेत पाले भी रहेंगे

घोष "सच हरिनाम" के संग
कारवाँ बढ़ता रहेगा
इन मसानों का धुआँ
यूँ ही सतत चढ़ता रहेगा

पालने नित सोहरों के
साथ डाले भी रहेंगे