"हिंदी की जय जयकार करें / राम सनेहीलाल शर्मा 'यायावर'" के अवतरणों में अंतर
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+ | हिंदी की जय-जयकार करें | ||
+ | हिंदी की जय-जयकार करें | ||
+ | हिंदी जन मन की अभिलाषा | ||
+ | यह राष्ट्र प्रेम की परिभाषा | ||
+ | भारत जिसमें प्रतिबिंबित है | ||
+ | यह ऐसी प्राणमयी भाषा | ||
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+ | पहचानें अपनी परंपरा | ||
+ | फिर संस्कृति का सत्कार करें | ||
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+ | भावों का सरस प्रबंध यही | ||
+ | अपनेपन का अनुबंध यही | ||
+ | जोड़े मुझको, तुमसे, उनसे | ||
+ | रिश्तों की मधुर सुगंध यही | ||
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+ | हिंदी प्राणों की उष्मा है | ||
+ | तन से-मन से स्वीकार करें | ||
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+ | यह विधापति का गान अमर | ||
+ | 'मानस' का स्वर-संधान अमर | ||
+ | ब्रज की रज में लिपटा-लिपटा | ||
+ | यह अपना ही रसखान अमर | ||
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+ | पहचानो ज़रा जायसी को | ||
+ | फिर भावों का संभार करें | ||
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+ | वीरत्व, ओज साकार यहाँ | ||
+ | भूषण की दृढ़ हुंकार यहाँ | ||
+ | चिड़ियों से बाज लड़ाऊँगा | ||
+ | गुरु गोविंद की ललकार यहाँ | ||
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+ | पहचानें स्वर की शक्ति प्रखर | ||
+ | दृढ़ता का ऋण स्वीकार करें | ||
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+ | आल्हा की दृढ़ हुंकार सुनो | ||
+ | बिरहा की करुण पुकार सुनो | ||
+ | ढोला, कजरी, फगुआ, चैता | ||
+ | पावस की मधुर मल्हार सुनो | ||
+ | |||
+ | जो व्याप्त मरण में, जीवन में | ||
+ | उसको जीवन-आधार करें | ||
+ | |||
+ | हिंदी दादी की दंत कथा | ||
+ | माँ की लोरी की यही प्रथा | ||
+ | अनुभव दुनिया का लिए हुए | ||
+ | यह है बाबा की राम कथा | ||
+ | |||
+ | हिंदी बहिनों की राखी है | ||
+ | तन-मन-प्राणों से प्यार करें। | ||
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18:58, 15 सितम्बर 2009 के समय का अवतरण
हिंदी की जय-जयकार करें
हिंदी की जय-जयकार करें
हिंदी जन मन की अभिलाषा
यह राष्ट्र प्रेम की परिभाषा
भारत जिसमें प्रतिबिंबित है
यह ऐसी प्राणमयी भाषा
पहचानें अपनी परंपरा
फिर संस्कृति का सत्कार करें
भावों का सरस प्रबंध यही
अपनेपन का अनुबंध यही
जोड़े मुझको, तुमसे, उनसे
रिश्तों की मधुर सुगंध यही
हिंदी प्राणों की उष्मा है
तन से-मन से स्वीकार करें
यह विधापति का गान अमर
'मानस' का स्वर-संधान अमर
ब्रज की रज में लिपटा-लिपटा
यह अपना ही रसखान अमर
पहचानो ज़रा जायसी को
फिर भावों का संभार करें
वीरत्व, ओज साकार यहाँ
भूषण की दृढ़ हुंकार यहाँ
चिड़ियों से बाज लड़ाऊँगा
गुरु गोविंद की ललकार यहाँ
पहचानें स्वर की शक्ति प्रखर
दृढ़ता का ऋण स्वीकार करें
आल्हा की दृढ़ हुंकार सुनो
बिरहा की करुण पुकार सुनो
ढोला, कजरी, फगुआ, चैता
पावस की मधुर मल्हार सुनो
जो व्याप्त मरण में, जीवन में
उसको जीवन-आधार करें
हिंदी दादी की दंत कथा
माँ की लोरी की यही प्रथा
अनुभव दुनिया का लिए हुए
यह है बाबा की राम कथा
हिंदी बहिनों की राखी है
तन-मन-प्राणों से प्यार करें।