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"अब कोई उसे कहाँ ढूंढे / अरुणा राय" के अवतरणों में अंतर

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खोती चली गई
अब कोई<br>
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14:44, 5 नवम्बर 2009 के समय का अवतरण

मेरी पतंग कटी
और
खोती चली गई
अरूणाकाश में...
अब कोई
उसे कहाँ ढूंढे...