भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"मन नहीं बदले अगर / कमलेश भट्ट 'कमल'" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
 
पंक्ति 1: पंक्ति 1:
कवि: [[कमलेश भट्ट कमल ]]
+
रचनाकार: [[कमलेश भट्ट 'कमल']]
 
[[Category:कविताएँ]]
 
[[Category:कविताएँ]]
[[Category:कमलेश भट्ट कमल ]]
+
[[Category:कमलेश भट्ट 'कमल']]
  
 
~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~
 
~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~

20:57, 11 दिसम्बर 2006 का अवतरण

रचनाकार: कमलेश भट्ट 'कमल'

~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~

मन नहीं बदले अगर तो सिर्फ तन से क्या ?

आये दिन के कीर्तन से या भजन से क्या ?


जो उजाला या तपिश कुछ भी न दे जाए

वह जले या बुझ भी जाए, उस अगन से क्या ?


बन्दिशें ही बन्दिशें जब हों उड़ानों पर

पंछियों को फिर परों से या गगन से क्या ?


आपके घर में हवा है और ताज़ा है

आपको माहौल की गहरी घुटन से क्या ?


ज़हनियत का भी पता देते हैं खुद कपड़े

ज़हनियत मर जाए तो फिर तन-बदन से क्या ?


जब गरीबों का कहीं कोई न अपना हो

मुल्क की सारी व्यवस्था से सदन से क्या ?


जो अँधेरों की तरफदारी में शामिल हो

वह किरन भी हो अगर तो उस किरन से क्या ?