भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"अर्थातीत / गोबिन्द प्रसाद" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=गोबिन्द प्रसाद |संग्रह=मैं नहीं था लिखते समय / ग…)
 
(कोई अंतर नहीं)

20:05, 4 जुलाई 2010 के समय का अवतरण


वह चाहता था
अर्थ के विरोध में एक शब्द खड़ा करना
जब तक वह कोई शब्द तलाश करता था
अँखुए की तरह फूटने लगता
शब्द में से कोई नया अर्थ
यही मुश्किल थी उसके लिए
कि अर्थ से परे शब्द को
विरोध में कैसे खड़ा किया जाए

विरोध की इसी धरती पर खड़ा होकर
उड़ना चाहता हूँ
शब्दों के आकाश में