भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"जुज़ क़ैस और कोई न आया / ग़ालिब" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
पंक्ति 4: पंक्ति 4:
 
}}  
 
}}  
 
[[Category:ग़ज़ल]]
 
[[Category:ग़ज़ल]]
 +
<poem>जुज़<ref></ref> क़ैस और कोई न आया बरूए-कार<ref></ref>
 +
सहरा मगर बतंगिए-चश्मे-हुसूद<ref></ref> था
  
जुज़ क़ैस और कोई न आया ब रू-ए-कार <br>
+
आशुफ़्तगी<ref>परेशानी</ref> ने नक़्श-सवैदा<ref>दिल के दाग़ का चिन्ह</ref> किया दुरुस्त
सहरा मगर ब तनगी-ए-चश्म-ए-हसूद था <br><br>
+
ज़ाहिर हुआ कि दाग़ का सरमाया दूद<ref>धुआं</ref> था
  
आशुफ़्तगी ने नक़्श-ए-सुवैदा किया दुरुस्त<br>
+
था ख़्वाब में ख़याल को तुझसे मुआ़मला
ज़ाहिर हुआ कि दाग़ का सर्मायह दूद था <br><br>
+
जब आँख खुल गई न ज़ियां<ref>हानि</ref> था न सूद था
  
था ख़्वाब में ख़ियाल को तुझ से मु`आमिलह <br>
+
लेता हूँ मकतबे-ग़मे-दिल<ref>दिल के ग़म की पाठशाला</ref> में सबक़े हनोज़<ref>अभी</ref>
जब आँख खुल गई न ज़ियां था न सूद था <br><br>
+
लेकिन यही कि 'रफ़्त' -- 'गया', और 'बूद' -- था
  
लेता हूँ मक्तब--ग़म-ए-दिल में सबक़ हनूज़ <br>
+
ढाँपा कफ़न ने दाग़े-अ़यूबे-बरहनगी<ref>नग्नता का दोष</ref>  
लेकिन यही कि रफ़्त गया और बून्द था <br><br>
+
मैं वर्ना हर लिबास में नंगे-वजूद<ref>अस्तित्व का कलंक</ref> था
  
ढाँपा कफ़न ने दाग़-ए-`उयूब-ए-बरहनगी <br>
+
तेशे बग़ैर मर न सका कोहकन<ref>फ़रहाद-शीरीं का प्रेमी</ref> 'असद'
मैं वरना हर लिबास में नंग-ए-वुजूद था <br><br>
+
सरगशता-ए<ref>बंधा हुआ</ref> ख़ुमारे-रुसूम-ओ-क़यूद<ref>रीति-रिवाज</ref> था
 
+
</poem>
तेरे बग़ैर मर न सका कोहकन असद <br>
+
{{KKMeaning}}
सर्गश्तह-ए-ख़ुमार-ए-रुसूम-ओ-क़ुयूद था
+

04:47, 27 फ़रवरी 2010 का अवतरण

जुज़<ref></ref> क़ैस और कोई न आया बरूए-कार<ref></ref>
सहरा मगर बतंगिए-चश्मे-हुसूद<ref></ref> था

आशुफ़्तगी<ref>परेशानी</ref> ने नक़्श-सवैदा<ref>दिल के दाग़ का चिन्ह</ref> किया दुरुस्त
ज़ाहिर हुआ कि दाग़ का सरमाया दूद<ref>धुआं</ref> था

था ख़्वाब में ख़याल को तुझसे मुआ़मला
जब आँख खुल गई न ज़ियां<ref>हानि</ref> था न सूद था

लेता हूँ मकतबे-ग़मे-दिल<ref>दिल के ग़म की पाठशाला</ref> में सबक़े हनोज़<ref>अभी</ref>
लेकिन यही कि 'रफ़्त' -- 'गया', और 'बूद' -- था

ढाँपा कफ़न ने दाग़े-अ़यूबे-बरहनगी<ref>नग्नता का दोष</ref>
मैं वर्ना हर लिबास में नंगे-वजूद<ref>अस्तित्व का कलंक</ref> था

तेशे बग़ैर मर न सका कोहकन<ref>फ़रहाद-शीरीं का प्रेमी</ref> 'असद'
सरगशता-ए<ref>बंधा हुआ</ref> ख़ुमारे-रुसूम-ओ-क़यूद<ref>रीति-रिवाज</ref> था

शब्दार्थ
<references/>