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ख़ुद्दार और सनकी / पीयूष दईया

No change in size, 17:34, 10 दिसम्बर 2010
उछल-उछल
टप्पे-टप्पे होती गेंद को
लोक रोक लेता हर बार
डाल आता फिर
अन्यों के पाले में
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