गृह
बेतरतीब
ध्यानसूची
सेटिंग्स
लॉग इन करें
कविता कोश के बारे में
अस्वीकरण
Changes
प्रार्थना / प्रदीप शुक्ल
No change in size
,
08:48, 15 नवम्बर 2020
और तभी दरवाज़े से
छुट्टी अन्दर आई
बोली, टीचर जी
मुझको हैं इतने सारे काम
सुबह धूप से बात करूँगी
दोपहर में लूडो खेलूँगी
अनिल जनविजय
Delete, Mover, Protect, Reupload, Uploader
54,035
edits