भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
"आखेट / कात्यायनी" के अवतरणों में अंतर
Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=कात्यायनी |संग्रह= }} <Poem> अजब-ग़जब से शस्त्र संभाल...) |
(कोई अंतर नहीं)
|
20:13, 15 नवम्बर 2008 का अवतरण
अजब-ग़जब से शस्त्र संभाले
थाम कलम की बेंट
आलोचक जी करने निकले
कविता का आखेट ।
शब्दों का सागर मथ डाला
सब-कुछ डाला फेंट
भाँति-भाँति के अर्थों से
करवाई दुर्लभ भेंट ।
इष्ट साधकर महामहिम ने
बस्ता लिया समेट
जो कुछ कवि ने किया-धरा था
सब-कुछ मटियामेट ।