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"रात में वर्षा / प्रयाग शुक्ल" के अवतरणों में अंतर

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गड़गड़ाते हुए
 
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बादल
 
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पेड़ तक, घर तक ।
 
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हवा को भेजते
 
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दर-दर ।
 
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इधर, इस ओर
 
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बिस्तर तक
 
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जगा है--
 
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चौंक कर ।
 
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यह एक
 
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बिजली-कौंध,
 
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भीतर तक
 
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उतर कर,
 
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कहाँ जाने गई ।
 
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ऊपर गड़गड़ाहट
 
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गड़गड़ाहट
 
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और कितनी !
 
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तनी
 
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साँसें
 
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सुन रही हैं वृष्टि
 
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अब भरपूर ।
 
अब भरपूर ।
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18:23, 1 जनवरी 2009 का अवतरण

गड़गड़ाते हुए
बादल
पेड़ तक, घर तक ।
हवा को भेजते
दर-दर ।
इधर, इस ओर
बिस्तर तक
जगा है--
चौंक कर ।
यह एक
बिजली-कौंध,
भीतर तक
उतर कर,
कहाँ जाने गई ।
ऊपर गड़गड़ाहट
गड़गड़ाहट
और कितनी !

तनी
साँसें
सुन रही हैं वृष्टि
अब भरपूर ।