भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"दिल्ली की बस यात्रा / जय छांछा" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=जय छांछा |संग्रह= }} Category:नेपाली भाषा {{KKCatKavita‎}} <Poem> ज़…)
 
(कोई अंतर नहीं)

09:59, 23 जुलाई 2010 के समय का अवतरण

ज़मीन जब तबे की तरह गर्म हो
तालकोल वाले लेन में इधर-उधर करते हुए
जून माह में दिल्ली की सार्वजनिक बस यात्रा
क्या कहूँ, बहुत रमणीय ही नहीं
चिरस्मरणीय भी रहता है ।
 
जून माह में दिल्ली में
सक्रिय होता है थर्मामीटर और
निक्रिय होता है बोरोमीटर
जीनव में एक बार अनुभव करने जैसा
मौसम होता है दिल्ली का
इसलिए आप भी, जैसे भी हो एक बार
दिल्ली आकर वह अनुभव कीजिए ।
सच, दिल्ली की बस यात्रा
जीवन भर याद रखने लायक होती है ।
 
दिल्ली की सड़कों पर दौड़ती बस
कहीं, बीच रास्ते में ही, एकाएक रूक सकती है
लेकिन थोड़ी सी भी हड़बड़ाहट की नहीं कोई ज़रूरत
आप भी बस से उतर कर
धक्का मारने में मदद कर सकते हैं, कोई कुछ नहीं कहेगा
और मन ही मन अनुभूति कर सकते हैं
दु:ख और पीड़ा के उस पार की

मैं गारंटी के साथ कहता हूँ
आनंद का एक बिंब जैसा समय
आपके अंदर वास जमायेगा ।
 
यात्रा के क्रम में ही नए-नए उत्पादों का
विज्ञापन करने वाले चढते हैं
और नए सामान के के गुणों का
बढ़ा-चढ़ा कर करते हैं बखान
और थमा सकते हैं आपके हाथों में भी
इच्छा हो तो खरीदें, नहीं तो वापस कर सकते हैं।
 
बहुत ज़्यादा गर्मी लगे तो
रूमाल निकाल कर पसीना पोंछिए
और उसी क्रम में यात्रा में जुटे रहिए
इस समय अचानक मन हुआ है पूछने का
क्या दिल्ली की बस यात्रा भूलने लायक है ?

मूल नेपाली से अनुवाद : अर्जुन निराला