भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
पक्षधर / रजत कृष्ण
Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 23:43, 4 जनवरी 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=रजत कृष्ण |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KKCatKavita...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
खंजर हो
नागरिक के हाथों में
और नागरिक की पीठ ही
हो एक मात्र लक्ष्य
ऐसे वक्त क्या करेंगे आप ?
पहचानेंगे हम
खंजर लिए हाथ
और खड़े होंगे
जीवन के पक्ष में ।
जीवन के पक्ष में बोले गए शब्द
चुभते हैं
धारदार खंजर को भी ।
खंजर चाहे काट ले
जुबान हमारी
हम होंगे पक्षधर
जीवन के ही
हाँ.. जी....व.....न... के ही ।।