Last modified on 1 अप्रैल 2011, at 22:46

सुरागरसी में निकला चाँद / केदारनाथ अग्रवाल

Pratishtha (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 22:46, 1 अप्रैल 2011 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

सुरागरसी में निकला चाँद
अपने भाई सूरज को खोजता रहा
और खोजते खोजते डूब भी गया
जैसे भाई सूरज डूब गया

रचनाकाल: ०८-१०-१९६७