हम गा रहे हैं
उनकी मौत का गाना
जिन्हें आता है अब
इंसान को हैवान बनाना
खुद अपने लिए आरामगाह
और दूसरों के लिए
जगह-ब-जगह
कत्लगाह बनाना
रचनाकाल: १२-१२-१९७०
हम गा रहे हैं
उनकी मौत का गाना
जिन्हें आता है अब
इंसान को हैवान बनाना
खुद अपने लिए आरामगाह
और दूसरों के लिए
जगह-ब-जगह
कत्लगाह बनाना
रचनाकाल: १२-१२-१९७०