Last modified on 25 फ़रवरी 2012, at 09:32

माँ के जाते ही / अनन्त आलोक

Dr. ashok shukla (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 09:32, 25 फ़रवरी 2012 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=अनन्त आलोक |संग्रह=}} {{KKCatKavita}} <poem> माँ क...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

माँ के जाते ही बाप गैर हो गया,
अपने ही लहू से उसको बैर हो गया,
घर ले आया इक पति हंता नार को,
आप ही कुटुंब पर कहर हो गया|