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मेरी बन्नी का रचा है ब्याह सखी री मंगल गाओ / हिन्दी लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

मेरी बन्नी का रचा है ब्याह सखी री मंगल गाओ-२

शीश बन्नी के टीका सोहे
नाक बन्नी के बेसर सोहे
झूमर पै इतर लगाओ सखी री मंगल गाओ

मेरी बन्नी का रचा है ब्याह सखी री मंगल गाओ-२

कान बन्नी के कुण्डल सोहे
हाथ बन्नी के मेंहदी सोहे
कंगन पै इतर लगाओ सखी री मंगल गाओ

मेरी बन्नी का रचा है ब्याह सखी री मंगल गाओ-२

गले बन्नी के हरवा सोहे
पैर बन्नी के पायल सोहे
बिछुवों पै इतर लगाओ सखी री मंगल गाओ

मेरी बन्नी का रचा है ब्याह सखी री मंगल गाओ-२

अंग बन्नी के साड़ी सोहे
संग बन्नी के बन्ना सोहे
जोड़े पै इतर लगाओ सखी री मंगल गाओ

मेरी बन्नी का रचा है ब्याह सखी री मंगल गाओ-२