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सूरज हुआ है पस्त ये मौसम तो देखिए / 'सज्जन' धर्मेन्द्र

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सूरज हुआ है पस्त ये मौसम तो देखिए।
बादल हुए हैं मस्त ये मौसम तो देखिए।

कागज़ गया है फूल सियाही बिखर गई,
निब की हुई शिकस्त ये मौसम तो देखिए।

सूरज नहीं दिखा तो घने बादलों को सब,
जोड़े हैं आज हस्त ये मौसम तो देखिए।

गंगा की शुद्धता हो या मिट्टी का ठोसपन,
सब हो गए हैं ध्वस्त ये मौसम तो देखिए।

यूँ बादलों से हो गई जुगनूँ की साठ-गाँठ,
तारे हुए हैं अस्त ये मौसम तो देखिए।