आज भी
बला का ख़ूबसूरत
और दर्शनीय है
तूतनखामेन ।
इतना जीवन्त
कि अब बोला, तब बोला,
अब मुस्काया, तब मुस्काया,
चुटकी बजाई किसी ने
कि आँखें खोल दीं
तूतनखामेन ने
वल्लाह
कमाल है कीमियागरों का
बहुत ख़ूब
ख़ूब ख़ूब इनाम के हक़दार हैं कीमियागर
मकबरे के वास्तुविद
सब कुछ कमाल का किया
कीमियागरों ने
बत्तीस सौ साल से
यथावत है
तूतनख़ामेन
वक़्त बदला
बत्तीस सौ साल बाद
मकबरे के अंधेरे से निकल
अजायबघर के उजाले में चला गया
तूतनखामेन ।
मौत के अंधे घेरे से निकल
मौत के उजले घेरे में चला गया
तूतनखामेन
बत्तीस सौ साल मकबरे में सोने के बाद
बत्तीस सौ साल अजायबघर में
सोता रहेगा इसी तरह
तूतनखामेन