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डाकिया की माँ / सैयद शहरोज़ क़मर

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गली-नुक्कड़,चौक-गलियारा
सीढ़ी-ज़ीना, खिड़की दरवाज़ा
हर्ष-विषाद की सूचनाएँ
अन्तड़ियों के गर्भ से खीम्ची गई
ताक़त से मारागयापैडल
'सूमो' को पीछे करने की
ख़ुशफ़हमी में ज़ंग-आलूद रीम पर
घिसटता पहिया

कई गुना तेज़ी से माँ
सुई में धागे पिरो रही है
शाह जलील<ref>काको, जहाँनाबाद के सूफ़ी सन्त, कवि की माँ के दादा</ref> की तावीज़
मोम व कपड़े में लपेटने की कोशिश में
ताकि जल्द-अज़-जल्द
बेटे तक भेज सके
 
07.08.1997

शब्दार्थ
<references/>