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मोर - 1 / सरोजिनी कुलश्रेष्ठ
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नाचो नाचो-नाचो मोर
कॐ कॐ का कर शोर
सतरंगे ये पंख उठाओ
छाते-सा उनको फैलाओ
घूमो घूमो-घूमो मोर
नाचो नाचो वन के मोर
पैरो में घुंघरू पहना दूँ
छनन छनन आवाज उठा दूँ
थिरको थिरको-थिरको मोर
लो छायी अब घटा सुहानी
रिमझिम कर बरसेगा पानी
भीग भीग कर नाचो मोर