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अओ जी हमहुँ मजूरे छी / पंकज कुमार

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छद्म राष्ट्रवादक
दम्भ भरैत छाती पर बैसिक'
हम करय चाहय छी
अपन कुरहरिसँ एहन प्रहार
जाहिसँ एक्कहि बेरमे उपटि जाइक
नागफेनीक सभटा कांट

बनब' चाहैत छी
सगर समाजक लेल
एकटा उन्मुक्त अकास
जे घेराओल अछि
महाभारतक वीर अभिमन्यु जकाँ
साओनक कारी बादरिसँ

बाहर निकालबाक अछि हमरा
क्लेशक रेहसँ मुँह नमरौने
असोथकित भेल ओहि संविधानकेँ
जे जालमे फंसि क'
सुटकुनिया मारि देने अछि
कोनो बामी माछ जकाँ

नहुं नहुं हम बना लेब
अपन बारीक पटुआसँ
हिस्टीरियाक दवाइ
जे मदति करतैक
एहि देशक हितकेँ
कोठी कान्ह पर राखि
नांगटे नाच करैत
सभ बीमार लोकक इलाजमे

नहि पड़ल हेतैक
बेगरता एडिसनकेँ
तेँ एकटा सामान्य बल्बक
आविष्कार कयलनि
हमरा शीघ्र
बनबय पड़त एकटा एहन बल्ब
जाहिसँ प्रकाशित हेतैक
कारी खकसियाह रातिक संगहि
किंकर्तव्यविमूढ़ भेल आत्मा

मजूरक धर्म
निमाहबाक लेल
लिखबे करब हम
उधेसल खेतकेँ तामि
कोनो कियारीमे
अझुका भूगोल
आ काल्हिक इतिहास।