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उसके पास रोटी थी / कविता भट्ट

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 उसके पास रोटी थी,
किन्तु भूख नहीं थी।
मेरे पास भूख तो थी,
किन्तु रोटी नहीं थी।

खपा वह भूख के लिए,
मिटा मैं रोटी के लिए।
भूख-रोटी दो विषयों पर,
बीत गए युग व युगान्तर।

संघर्ष रुका नहीं अब भी,
समय तो धृतराष्ट्र था ही।
किन्तु; प्रश्न तो यह है भारी
इतिहास क्यों बना गान्धारी ?