भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

देवता कहलाता है / सदानंद सुमन

Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता ५ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 23:35, 9 जनवरी 2021 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=सदानंद सुमन |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KKCat...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

समुद्र मंथन के बाद
आया
सिर्फ देवताओं के हिस्से
अमृत-कलश
जबकि मथा मिलकर समुद्र
देव-दानव दोनों ने

दानवों
अर्थात् नादानों ने
सहे कष्ट सबसे अधिक
फिर भी गये छले
रहे वंचित वे ही
अमृत-बूंद से!

षडयंत्रकर्ता
विश्वासहंता
तबसे ही
राज करता
सुख भोगता
और पूजित होता है
देवता कहलाता है!