भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

उम्मीद / मृत्युंजय प्रभाकर

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 19:53, 22 जून 2009 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

वे आ रहे थे
आ रहे थे
रहे थे
थे

वे आ रहे हैं
आ रहे हैं
रहे हैं
हैं

वे ज़रूर आएंगे
ज़रूर आएंगे
आएंगे

ज़रूर!
 


रचनाकाल : 10.11.07