Last modified on 20 नवम्बर 2010, at 15:15

रातें हैं उदास दिन कड़े हैं / फ़राज़

Bohra.sankalp (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 15:15, 20 नवम्बर 2010 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=अहमद फ़राज़ |संग्रह= }} Category:ग़ज़ल <poem> रातें हैं उ…)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

रातें हैं उदास दिन कड़े हैं,
ऐ दिल तेरे हौसले बड़े हैं,

ऐ यादे-हबीब साथ देना,
कुछ मरहले सख़्त आ पड़े हैं,

रूकना हो अगर तो सौ बहाने,
जाना हो तो रास्ते बड़े हैं,

अब किसे बतायें वजहे-गिरीया,
जब आप भी साथ रो पड़े हैं,

अब जाने कहाँ नसीब ले जायें,
घर से तो ‘फ़राज़’ चल पड़े हैं,