थी बहती सदफ़ में बन्द यकता गौहर :
ऎसे आलम में किसको तकता गौहर !
दिल अपना जो देख सकता ठ्हरा है कहाँ--
दरिया का सुकून देख सकता गौहर !
सदफ़=सीप; यकता=अद्वितीय; गौहर=मोती
(रचनाकाल: )
थी बहती सदफ़ में बन्द यकता गौहर :
ऎसे आलम में किसको तकता गौहर !
दिल अपना जो देख सकता ठ्हरा है कहाँ--
दरिया का सुकून देख सकता गौहर !
सदफ़=सीप; यकता=अद्वितीय; गौहर=मोती
(रचनाकाल: )