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Kavita Kosh से
ओ नये नाथ सुण मेरी बात,
या चन्द्र्किरण चन्द्रकिरण जोगी तनै तन-मन-धन तै चाव्है सै!
नीचे नै कंमन्द लटकार्ही चढ्ज्या क्यूँ वार लगावै सै !!