के सोचती होवैली वा
जद होवै ऐकली !
लट्टू होवै आपरी सुन्दरता पर
या करै याद दुनिया री बदसूरती !
कीं ना कीं तो सोचती हुवैली
सीसै रै सामीं बैठी लुगाई।
के सोचती होवैली वा
जद होवै ऐकली !
लट्टू होवै आपरी सुन्दरता पर
या करै याद दुनिया री बदसूरती !
कीं ना कीं तो सोचती हुवैली
सीसै रै सामीं बैठी लुगाई।